भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है। रूसी तेल आयात को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचनाओं के संदर्भ में उन्होंने कहा कि विकासशील देशों की ऊर्जा आवश्यकताओं और आर्थिक वास्तविकताओं को समझे बिना नैतिकता का पाठ पढ़ाना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी देश के 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना और उनके हितों की रक्षा करना है। जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि कई विकसित देश स्वयं भी अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा आवश्यकताओं के आधार पर नीतिगत फैसले लेते रहे हैं। विदेश मंत्री के अनुसार, ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इसकी ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सस्ती और विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा लागत नियंत्रित रहने से उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है, महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है और आर्थिक विकास को गति मिलती है। इसी कारण भारत अपनी ऊर्जा खरीद नीतियों को राष्ट्रीय हितों और व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुरूप निर्धारित करता है। आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से ऊर्जा सुरक्षा देश की दीर्घकालिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है। भारत एक ओर अपनी वर्तमान ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों से ऊर्जा आयात सुनिश्चित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, सौर एवं पवन ऊर्जा तथा स्वदेशी ऊर्जा संसाधनों के विकास पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। सरकार का लक्ष्य भविष्य में आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करना और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊर्जा आत्मनिर्भरता न केवल आर्थिक मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता और वैश्विक स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता को भी और अधिक सशक्त बनाएगी।
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