रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा आतंकवाद को समर्थन देने वाली शक्तियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। हैदराबाद में आयोजित एक बौद्धिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत शांति, स्थिरता और सद्भावना में विश्वास करता है, लेकिन जब देश की सुरक्षा और संप्रभुता का प्रश्न आता है तो आवश्यक निर्णय लेने में कभी पीछे नहीं हटता। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की नीति हमेशा राष्ट्रीय हितों और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की रही है। राजनाथ सिंह ने जल संसाधनों के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत अपने जल संसाधनों का उपयोग न्यायसंगत, जिम्मेदार और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जल, ऊर्जा और अन्य प्राकृतिक संसाधन देश के विकास, आर्थिक प्रगति और सामाजिक समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इन संसाधनों का संरक्षण, प्रबंधन और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण संसाधनों और राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा भी इसका अभिन्न हिस्सा है। आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से जल, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन राष्ट्रीय विकास की मजबूत नींव तैयार करता है। संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग कृषि, उद्योग, ऊर्जा उत्पादन और रोजगार सृजन को गति देता है, जिससे देश की आर्थिक शक्ति बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संसाधनों की सुरक्षा और उनका राष्ट्रहित में उपयोग भारत को अधिक सक्षम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यही कारण है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा उनके सतत उपयोग को भी समान महत्व दे रही है, ताकि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को और मजबूती मिल सके।
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