IIT Guwahati के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह स्वदेशी सीमेंट मोर्टार परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस उन्नत मोर्टार को इस तरह तैयार किया गया है कि यह पारंपरिक कंक्रीट की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ और घनत्व में बेहतर हो, जिससे यह हानिकारक विकिरण को प्रभावी रूप से अवशोषित और अवरुद्ध कर सके।
शोध में सूक्ष्म कणों (माइक्रो-पार्टिकल्स) के संतुलित उपयोग के जरिए इसकी संरचना को अनुकूलित किया गया है, जिससे न केवल इसकी यांत्रिक शक्ति बढ़ी है बल्कि रेडिएशन शील्डिंग क्षमता भी काफी बेहतर हुई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मोर्टार से बने ढांचे विकिरण रिसाव के जोखिम को कम करने में सक्षम होंगे, खासकर उन परिस्थितियों में जहां भूकंप, विस्फोट या तापमान में अचानक बदलाव जैसे खतरे मौजूद हों।
Chernobyl disaster और Fukushima nuclear disaster जैसी घटनाओं से मिले सबक के बाद यह नवाचार और भी अहम हो जाता है। भविष्य में इस तकनीक को परमाणु ऊर्जा एजेंसियों और निर्माण कंपनियों के सहयोग से बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है, जिससे सुरक्षित, विश्वसनीय और दीर्घकालिक परमाणु बुनियादी ढांचे के विकास को नई दिशा मिलेगी।
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