सौर ऊर्जा में राजस्थान नंबर-1, लेकिन ट्रांसमिशन की कमी से हजारों मेगावॉट बिजली बेकार

Rajasthan सौर ऊर्जा के मामले में देश में सबसे आगे बना हुआ है और भारत की कुल सोलर क्षमता में इसकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है, जिससे यह साफ होता है कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस बड़ी उपलब्धि के बावजूद एक गंभीर समस्या सामने आ रही है, जो इसकी प्रगति को प्रभावित कर रही है। राज्य में ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण हर दिन भारी मात्रा में सौर ऊर्जा का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है और हजारों मेगावॉट बिजली बेकार चली जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना करीब 1500 से 2000 मेगावॉट सौर बिजली ग्रिड तक नहीं पहुंच पाती, जिससे न सिर्फ ऊर्जा की बर्बादी हो रही है, बल्कि यह राज्य की कार्यक्षमता पर भी सवाल खड़े करता है।

इस समस्या का सीधा असर उन कंपनियों और निवेशकों पर पड़ रहा है, जिन्होंने सौर परियोजनाओं में भारी निवेश किया है। ये कंपनियां अक्सर बड़े कर्ज लेकर प्रोजेक्ट शुरू करती हैं और उनकी कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि उत्पादित बिजली बाजार तक पहुंचे। जब बिजली का ट्रांसमिशन नहीं हो पाता, तो उनकी आय घट जाती है और आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर भी जोखिम बढ़ता है, क्योंकि निवेश की वापसी प्रभावित होती है।

कुल मिलाकर, राजस्थान सौर ऊर्जा उत्पादन में नंबर-1 होने के बावजूद ट्रांसमिशन व्यवस्था की कमजोरी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। अगर इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो इससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र में नुकसान होगा, बल्कि भविष्य में निवेश और विकास की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है।


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