पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच सरकार ने घरेलू उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए कई अहम पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर 30 जून 2026 तक सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है। इस कदम का मकसद कच्चे माल की बढ़ती लागत और सप्लाई में आ रही दिक्कतों से जूझ रहे उद्योगों को तुरंत राहत देना है। वित्त मंत्रालय के अनुसार यह एक अस्थायी लेकिन लक्षित उपाय है, जिससे पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक, मोनोमर, इंटरमीडिएट, पॉलिमर और रेजिन जैसे जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता बनी रहेगी और डाउनस्ट्रीम सेक्टर पर लागत का दबाव कम होगा। इसका सीधा फायदा प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मा, केमिकल और ऑटो कंपोनेंट जैसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा, जहां इन पदार्थों का व्यापक उपयोग होता है। उम्मीद है कि इससे उत्पादन लागत घटेगी और आगे चलकर उपभोक्ताओं को भी सस्ते उत्पाद मिल सकते हैं। जिन प्रमुख केमिकल्स पर छूट दी गई है, उनमें एनहाइड्रस अमोनिया, मेथनॉल, टोल्यून, स्टाइरीन, आइसोप्रोपाइल अल्कोहल, एसीटिक एसिड, फिनोल और मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल (MEG) शामिल हैं।
साथ ही विनाइल क्लोराइड मोनोमर, विनाइल एसीटेट मोनोमर, प्यूरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA), एथिलीनडायमीन और टोल्यून डाय-आइसोसाइनेट जैसे इंटरमीडिएट्स भी इसमें शामिल किए गए हैं। पॉलिमर और रेजिन कैटेगरी में पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइरीन, PVC, PET चिप्स, पॉलीकार्बोनेट्स, एपॉक्सी रेजिन और पॉलीयूरेथेन के अलावा ABS, PEEK और PPS जैसी स्पेशलिटी सामग्री पर भी छूट लागू होगी। कुल मिलाकर यह फैसला उद्योगों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन दबाव में है और कच्चे माल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं।
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