भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां विकास के मौके तो मौजूद हैं, लेकिन कुछ संकेत चिंता भी बढ़ा रहे हैं, खासकर विदेशी निवेश में गिरावट और पूंजी के बाहर जाने की बढ़ती प्रवृत्ति। SBI Research की हालिया रिपोर्ट के अनुसार FY27 में भारत की ट्रेड ग्रोथ सीमित रह सकती है, जहां निर्यात 5 से 5.5 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है, जबकि आयात 6.5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, यानी आयात की रफ्तार ज्यादा रहने से व्यापार घाटा बना रह सकता है। इसके साथ ही RBI के आंकड़े बताते हैं कि देश में नेट एफडीआई लगातार दबाव में है और कई महीनों से निगेटिव ट्रेंड में चल रहा है, क्योंकि विदेशी कंपनियां जितना निवेश कर रही हैं,
उससे ज्यादा पैसा वापस अपने देशों में ले जा रही हैं। यही नहीं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में भी FY26 के दौरान करीब 16.6 अरब डॉलर का आउटफ्लो दर्ज किया गया, जो पिछले कई दशकों में सबसे ज्यादा है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका असर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है, क्योंकि भारतीय कंपनियां भी विदेशों में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं, जिससे आउटवर्ड एफडीआई बढ़ रहा है। कुल मिलाकर, इन परिस्थितियों का अर्थव्यवस्था पर मिला-जुला असर पड़ सकता है
एक ओर रुपये पर दबाव और निवेश में कमी की चिंता है, तो दूसरी ओर वैश्विक बाजारों में भारत की भागीदारी और विस्तार के नए अवसर भी बन रहे हैं। आने वाले समय में वैश्विक हालात, भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू नीतियां यह तय करेंगी कि भारत की आर्थिक रफ्तार पर इसका कितना असर पड़ेगा।
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