पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत के व्यापारिक हितों पर भी साफ दिखने लगा है। नीति आयोग की ताजा तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, भारत और Gulf Cooperation Council (GCC) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत की रफ्तार धीमी पड़ गई है। यह समझौता भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा था, क्योंकि खाड़ी देश भारत के ऊर्जा आयात, निर्यात और विदेशों में काम करने वाले भारतीयों से आने वाले प्रेषण (remittances) का बड़ा स्रोत हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम एशिया से होकर गुजरने वाला वैश्विक व्यापार भी प्रभावित हो रहा है, जिससे सप्लाई चेन और बाजार पहुंच पर असर पड़ रहा है।
साथ ही, रिपोर्ट में भारत के रत्न एवं आभूषण सेक्टर को लेकर चिंता जताई गई है। करीब 378 अरब डॉलर के इस वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 7.8% है, जबकि रॉ गोल्ड को शामिल करने पर कुल हिस्सेदारी 2015 के 6.1% से घटकर 2024 में मात्र 2.9% रह गई है। यह गिरावट बताती है कि भारत को इस सेक्टर में अधिक वैल्यू एडिशन, नए बाजारों में विस्तार और वैश्विक व्यापार नेटवर्क से बेहतर जुड़ाव की जरूरत है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र भले ही रोजगार (50 लाख से अधिक लोगों को काम) और उत्पादन क्षमता के लिहाज से मजबूत है, लेकिन इसमें कई संरचनात्मक कमजोरियां हैं—जैसे सीमित वैल्यू एडिशन, फाइनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, और नीतिगत बाधाएं। अगर इन समस्याओं को दूर नहीं किया गया, तो भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कमजोर हो सकती है। कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट और घरेलू संरचनात्मक चुनौतियां मिलकर भारत के व्यापार विस्तार की रफ्तार को फिलहाल धीमा कर रही हैं।
Dharmakshetra, Shiv Shakti Mandir, Babu Genu Marg,
Sector 8, Rama Krishna Puram,
New Delhi, Delhi 110022
+91 80031 98250
info@mysba.co.in