राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर सरकार को अपने दावों और लोकप्रियता पर पूरा भरोसा है, तो उसे लोकसभा भंग कर देश में चुनाव कराकर नया जनादेश लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में महिलाओं के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की कोशिश की, लेकिन यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है और असली स्थिति चुनाव से ही सामने आएगी। गहलोत ने परिसीमन के मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि 2026 की संभावित जातिगत जनगणना से पहले 2011 के आंकड़ों के आधार पर सीमांकन करना ओबीसी वर्ग, खासकर महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है, क्योंकि नई जनगणना से उनकी वास्तविक आबादी सामने आती और उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिल पाता। इसके अलावा उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और कहा कि चुनावी माहौल के बीच इस तरह के संबोधन आचार संहिता के खिलाफ हैं, लेकिन आयोग कोई कार्रवाई नहीं करता।
गहलोत के मुताबिक जनता का असली भरोसा और सरकार की ताकत केवल चुनाव के जरिए ही परखी जा सकती है, इसलिए सरकार को सीधे जनता के बीच जाकर अपनी बात साबित करनी चाहिए।
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