वैज्ञानिकों की नई खोज ने बैटरी टेक्नोलॉजी की दुनिया में बड़ा बदलाव दिखाया है, जहां अब पारंपरिक Lithium-ion Battery के मुकाबले Aluminium-ion Battery को ज्यादा सुरक्षित, सस्ता और टिकाऊ विकल्प माना जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि एल्यूमिनियम पृथ्वी पर बहुत अधिक मात्रा में उपलब्ध होता है, जबकि लिथियम सीमित संसाधन है और महंगा भी पड़ता है। इसी वजह से एल्यूमिनियम बैटरियों की लागत काफी कम हो सकती है, जिससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों और ऊर्जा स्टोरेज सिस्टम सस्ते हो सकते हैं। सुरक्षा के मामले में भी एल्यूमिनियम बैटरियां बेहतर मानी जा रही हैं, क्योंकि इनमें आग लगने या फटने का खतरा लिथियम बैटरियों की तुलना में कम होता है
पहले एल्यूमिनियम बैटरियों की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी कम स्थिरता थी, क्योंकि चार्जिंग के दौरान अंदर का मटेरियल जल्दी खराब हो जाता था और बैटरी की क्षमता घट जाती थी, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक नया कंपोजिट इलेक्ट्रोड तैयार किया है जिसमें वैनाडियम ऑक्साइड को MXene जैसे खास मटेरियल के साथ जोड़ा गया है। यह MXene एक मजबूत सपोर्ट की तरह काम करता है और बैटरी के अंदर मटेरियल को स्थिर बनाए रखता है, जिससे घुलने की समस्या लगभग 80% तक कम हो गई है। इस सुधार के कारण बैटरी की उम्र बढ़ी है और यह लंबे समय तक अपनी क्षमता बनाए रख सकती है। प्रदर्शन के लिहाज से भी यह नई तकनीक बेहतर साबित हुई है, क्योंकि कई चार्जिंग साइकिल के बाद भी बैटरी की क्षमता काफी हद तक बनी रहती है। कुल मिलाकर, एल्यूमिनियम-आयन बैटरियां भविष्य में ऊर्जा स्टोरेज के क्षेत्र में एक बड़ा विकल्प बन सकती हैं, जो न केवल सस्ती और सुरक्षित होंगी बल्कि पर्यावरण के लिए भी ज्यादा अनुकूल साबित होंगी।
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