असंगठित रोजगार में यूपी नंबर-1, एक साल में जुड़े 75 लाख नए रोजगार

भारत के असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र में रोजगार के मोर्चे पर बड़ी तेजी देखने को मिली है। National Statistical Office (NSO) द्वारा जारी असंगठित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE) 2025 के अनुसार देश में एक साल के भीतर करीब 75 लाख नए रोजगार जुड़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में इस क्षेत्र में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 12.81 करोड़ पहुंच गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 12.06 करोड़ था। इस सर्वे में निर्माण और कॉरपोरेट एंटरप्राइज को शामिल नहीं किया गया है। रिपोर्ट में सबसे बड़ी उपलब्धि Uttar Pradesh के नाम रही, जिसने असंगठित गैर-कृषि रोजगार और प्रतिष्ठानों दोनों में देश में पहला स्थान हासिल किया। आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र के कुल प्रतिष्ठानों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 13.8 प्रतिशत रही, जबकि यहां काम करने वाले श्रमिकों की हिस्सेदारी 14.5 प्रतिशत दर्ज की गई, जो देश में सबसे अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे कारोबार, स्थानीय उद्योगों और बढ़ती स्वरोजगार गतिविधियों के कारण यूपी में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार West Bengal इस सूची में दूसरे स्थान पर रहा। पश्चिम बंगाल की असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में 13.2 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, जबकि श्रमिकों की हिस्सेदारी 10.4 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं Maharashtra 8.3 प्रतिशत प्रतिष्ठानों और 9.1 प्रतिशत श्रमिकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इन तीन राज्यों की कुल हिस्सेदारी देश के असंगठित गैर-कृषि प्रतिष्ठानों में लगभग 35 प्रतिशत रही। हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि केवल प्रतिष्ठानों की संख्या ही आर्थिक ताकत तय नहीं करती। महाराष्ट्र और Tamil Nadu जैसे राज्य कम प्रतिष्ठानों के बावजूद ज्यादा आर्थिक मूल्य पैदा कर रहे हैं। सकल मूल्यवर्धन (GVA) में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 11.2 प्रतिशत और तमिलनाडु की 8.2 प्रतिशत रही। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश 11.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश के कुल सकल मूल्यवर्धन में सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य बना हुआ है। शहरी क्षेत्रों के GVA में महाराष्ट्र पहले स्थान पर रहा, जबकि उसके बाद उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान रहा। रिपोर्ट में डिजिटल विभाजन और इंटरनेट उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। देशभर में असंगठित उद्यमों में इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन राज्यों के बीच डिजिटल स्वीकार्यता में बड़ा अंतर दिखाई दिया। Delhi इंटरनेट उपयोग के मामले में सबसे आगे रहा, जहां 71.1 प्रतिशत उद्यम डिजिटल रूप से जुड़े पाए गए। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 18.7 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 25.7 प्रतिशत रहा, जो अपेक्षाकृत काफी कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल रूप से मजबूत राज्यों में उत्पादकता और आय का स्तर भी अधिक है। दिल्ली, हरियाणा और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रति प्रतिष्ठान और प्रति श्रमिक सकल मूल्यवर्धन राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक पाया गया। रिपोर्ट यह संकेत देती है कि आने वाले समय में डिजिटल तकनीक और इंटरनेट की पहुंच बढ़ाकर असंगठित क्षेत्र की उत्पादकता और रोजगार क्षमता को और मजबूत किया जा सकता है। कुल मिलाकर NSO की यह रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, क्योंकि असंगठित क्षेत्र देश के करोड़ों लोगों को रोजगार देने वाला सबसे बड़ा आधार बना हुआ है।

Manisha Saini
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