भारत सरकार ने देश की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए लगभग ₹1.05 लाख करोड़ के रक्षा साजो-सामान खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) द्वारा स्वीकृत इन प्रस्तावों में सतह से हवा में मार करने वाली आधुनिक मिसाइलें, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, ड्रोन तकनीक, एयर डिफेंस सिस्टम और नौसेना के लिए अत्याधुनिक उपकरण शामिल हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेनाओं को आधुनिक तकनीक से लैस करना और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार करना है। रक्षा क्षेत्र में तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों और आधुनिक युद्ध तकनीकों को देखते हुए भारत लगातार अपने सैन्य ढांचे को मजबूत करने में जुटा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश की सामरिक शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती देगा, क्योंकि इनमें से कई उपकरण स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 2025-26 के दौरान कई बड़े रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जुलाई 2025 में DAC ने लगभग ₹1.05 लाख करोड़ के 10 पूंजीगत रक्षा खरीद प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इनमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, विस्फोटक हथियार रोधी पोत और नौसेना के लिए स्वायत्त पोत शामिल थे। इसके बाद अगस्त 2025 में करीब ₹67,000 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिनमें पर्वतीय रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, BrahMos फायर कंट्रोल सिस्टम और तीनों सेनाओं के लिए मध्यम ऊंचाई वाले लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन शामिल थे। सितंबर 2025 में [Hindustan Aeronautics Limited](https://www.hal-india.co.in?utm_source=chatgpt.com) (HAL) ने भारतीय वायुसेना के लिए 97 हल्के लड़ाकू विमान Mk1A की खरीद हेतु ₹62,370 करोड़ का बड़ा अनुबंध हासिल किया। इन विमानों में स्वदेशी ‘उत्तम रडार’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं नवंबर 2025 में HAL ने अमेरिकी कंपनी [GE Aerospace](https://www.geaerospace.com?utm_source=chatgpt.com) के साथ 113 F404 इंजन खरीदने का समझौता भी किया, जिससे LCA Mk1A कार्यक्रम को गति मिलेगी। रक्षा आधुनिकीकरण की यह प्रक्रिया 2026 में भी तेज रही। मार्च 2026 में DAC ने लगभग ₹2.38 लाख करोड़ के अतिरिक्त रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनमें S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, सेना के लिए एयर डिफेंस ट्रैक सिस्टम, दूर से संचालित हमलावर विमान और मध्यम परिवहन विमान शामिल हैं। दिसंबर 2025 में भी लगभग ₹79,000 करोड़ के प्रस्ताव स्वीकृत किए गए थे, जिनमें पिनाका लंबी दूरी के रॉकेट, एस्ट्रा Mk-II मिसाइलें, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम और लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम शामिल थे। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल ₹6.81 लाख करोड़ के 109 रक्षा प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी और ₹2.28 लाख करोड़ के 503 पूंजीगत रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। वहीं वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा आधुनिकीकरण के लिए पूंजीगत मद के तहत ₹2.19 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21.84 प्रतिशत अधिक है। सरकार का फोकस अब एयर डिफेंस, मानवरहित प्रणालियों, मिसाइल तकनीक और स्वदेशी सैन्य उपकरणों के विकास पर है, जिससे भारत की रक्षा क्षमता आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
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