भारत में खेती तेजी से तकनीक आधारित होती जा रही है और इस बदलाव के केंद्र में कृषि ड्रोन उभरकर सामने आए हैं। बढ़ती आबादी, बदलते मौसम, मजदूरों की कमी और खेती की बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों के बीच ड्रोन किसानों के लिए एक आधुनिक समाधान बन रहे हैं। ड्रोन ऐसे उन्नत उपकरण हैं जो कैमरों, जीपीएस और विशेष सेंसरों से लैस होते हैं तथा आसमान से पूरे खेत की निगरानी कर सकते हैं। जहां पहले एक एकड़ खेत में दवा का छिड़काव करने में कई घंटे लग जाते थे, वहीं आधुनिक कृषि ड्रोन 10 से 15 मिनट में यह काम पूरा कर देते हैं। इससे समय की बचत होती है और श्रम लागत में 70 से 80 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। यही कारण है कि ड्रोन तकनीक को खेती का भविष्य माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सटीकता है। पारंपरिक तरीकों में कीटनाशकों और उर्वरकों का काफी हिस्सा बर्बाद हो जाता था, जबकि ड्रोन नियंत्रित मात्रा में पूरे खेत में समान रूप से छिड़काव करते हैं। इससे फसलों को आवश्यक पोषण मिलता है, रसायनों की बर्बादी कम होती है और मजदूरों का जहरीले रसायनों से सीधा संपर्क भी घटता है। ड्रोन में लगे मल्टीस्पेक्ट्रल और थर्मल कैमरे फसलों की सेहत का विश्लेषण कर सकते हैं। यदि किसी क्षेत्र में कीटों का प्रकोप, बीमारी या पोषक तत्वों की कमी हो तो उसकी पहचान शुरुआती चरण में ही हो जाती है। थर्मल सेंसर यह भी बताते हैं कि खेत के किस हिस्से में पानी की कमी है, जिससे किसान केवल जरूरत वाले क्षेत्रों में सिंचाई कर सकते हैं और पानी व बिजली दोनों की बचत होती है। हालांकि इस तकनीक के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। ड्रोन की कीमत अभी भी छोटे किसानों के लिए अधिक है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, सीमित बैटरी क्षमता और तकनीकी प्रशिक्षण की कमी भी बाधा बनती है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी और किराये पर ड्रोन उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रही है। किसान उत्पादक संगठन (FPO) और कस्टम हायरिंग सेंटर छोटे किसानों को कम लागत पर ड्रोन सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इससे अधिक से अधिक किसान इस तकनीक का लाभ उठा पा रहे हैं और आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इस बदलाव की एक प्रेरणादायक तस्वीर “ड्रोन दीदी” पहल के रूप में सामने आई है। देश के कई राज्यों में महिलाएं ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लेकर कृषि सेवाएं प्रदान कर रही हैं। ये महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं बल्कि गांवों में तकनीकी जागरूकता भी फैला रही हैं। आने वाले वर्षों में जब ड्रोन तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा के साथ और अधिक जुड़ जाएगी, तब खेती और भी स्मार्ट हो जाएगी। भविष्य में ड्रोन स्वयं यह तय कर सकेंगे कि किस फसल को कितनी दवा, खाद या पानी चाहिए। बीमारी का खतरा पहले ही पता चल जाएगा और किसानों को उत्पादन का बेहतर अनुमान मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सही प्रशिक्षण, सरकारी सहयोग और तकनीकी विस्तार के साथ कृषि ड्रोन भारतीय खेती में नई क्रांति ला सकते हैं और खेती को अधिक लाभदायक, टिकाऊ तथा आधुनिक बना सकते हैं।
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