भारत में डिजिटल सेवाओं को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। Digital India Bhashini Division (DIBD) और Government e-Marketplace (GeM) ने सार्वजनिक खरीद प्रणाली में भारतीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी की है। इस पहल के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित भाषा तकनीक का उपयोग कर GeM प्लेटफॉर्म को विभिन्न भारतीय भाषाओं में अधिक आसान और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग राज्यों के विक्रेताओं, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और ग्रामीण क्षेत्रों के कारोबारियों को उनकी मातृभाषा में सरकारी खरीद प्रणाली तक पहुंच प्रदान करना है। इस पहल से उन लाखों छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को लाभ मिलने की उम्मीद है जो भाषा संबंधी बाधाओं के कारण डिजिटल सरकारी प्लेटफॉर्म का पूरा उपयोग नहीं कर पाते थे। अब वे अपनी स्थानीय भाषा में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, निविदाओं को समझ सकेंगे और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में आसानी से भाग ले सकेंगे। इससे सार्वजनिक खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, अधिक विक्रेताओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी और स्थानीय उद्योगों को सरकारी बाजार तक पहुंच बनाने का बेहतर अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह कदम डिजिटल शासन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद करेगा। आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल इंडिया के व्यापक लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। स्वदेशी AI आधारित भाषा समाधान न केवल तकनीक के लोकतंत्रीकरण को मजबूत करेंगे, बल्कि डिजिटल समावेशन, स्थानीय उद्यमिता और आर्थिक अवसरों के विस्तार को भी नई गति देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय भाषाओं में उपलब्ध डिजिटल सेवाएं छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा करेंगी तथा देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी और सशक्त बनाएंगी। साथ ही, भारत की भाषाई विविधता को तकनीकी प्रगति के साथ जोड़कर विकास का नया मॉडल तैयार किया जा सकेगा।
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