अतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले Rishikesh में गंगा नदी के पवित्र तट पर स्थित नीम बीच, तपोवन आमखाला क्षेत्र में भारतीय सेना के जवानों के लिए एक विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य सैनिकों के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, एकाग्रता और आंतरिक ऊर्जा को मजबूत बनाना था। योग प्रशिक्षकों ने जवानों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया तथा योग के वैज्ञानिक और व्यावहारिक लाभों की जानकारी दी। शिविर के दौरान सैनिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। प्रशिक्षकों ने बताया कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह तनाव प्रबंधन, मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक संतुलन और निर्णय क्षमता को भी बेहतर बनाता है। सेना के जवान अक्सर कठिन परिस्थितियों, चुनौतीपूर्ण वातावरण और उच्च दबाव वाले कार्यों का सामना करते हैं। ऐसे में योग उनके मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने, आत्मविश्वास बढ़ाने और विपरीत परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। नियमित योग अभ्यास से शारीरिक सहनशक्ति, लचीलापन और एकाग्रता में भी वृद्धि होती है, जो सैनिक जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक गुण हैं। आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का एक अमूल्य उपहार है, जिसने पूरे विश्व को स्वस्थ और संतुलित जीवन का मार्ग दिखाया है। किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त नागरिक और सैनिक होते हैं। योग अनुशासन, आत्मसंयम, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास करता है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक मूल तत्व हैं। ऐसे आयोजन न केवल सैनिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं, जिससे एक मजबूत, स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को नई ऊर्जा मिलती है।
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