अल-नीनो के खतरे से निपटने की तैयारी, दलहन और कपास उत्पादन बढ़ाने पर जोर

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में खरीफ 2026 की तैयारियों का आकलन करते हुए संभावित अल-नीनो प्रभाव से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाने के निर्देश दिए। बैठक में कम वर्षा या असमान वर्षा की आशंका वाले जिलों की पहचान कर पहले से फसलवार कंटिंजेंसी प्लान तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों के सहयोग से ऐसे क्षेत्रों में जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतरफसली खेती (इंटरक्रॉपिंग) और वैकल्पिक फसल पैटर्न को बढ़ावा दिया जाए, ताकि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी किसानों की फसल और आय सुरक्षित रह सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर जोखिमग्रस्त जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अलग रणनीति तैयार की जानी चाहिए, जिससे किसानों को समय पर सलाह, विकल्प और सहायता उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में अल-नीनो के संभावित प्रभाव वाले 9 से 10 राज्यों पर विशेष चर्चा हुई। मंत्री ने निर्देश दिए कि चिन्हित जिलों में जिला प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) और अन्य विस्तार तंत्र के साथ समन्वय बैठकों का आयोजन किया जाए। इन बैठकों के माध्यम से किसानों को मौसम संबंधी संभावित चुनौतियों और उनके समाधान के बारे में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों तक वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित, भरोसेमंद और समाधान-केंद्रित जानकारी पहुंचाई जानी चाहिए, ताकि अनावश्यक चिंता न फैले और किसान समय रहते उचित निर्णय ले सकें। खरीफ 2026 की फसलवार तैयारियों की समीक्षा के दौरान कपास उत्पादन बढ़ाने को भी प्राथमिकता दी गई। इसके लिए उन्नत किस्मों के चयन, वैज्ञानिक खेती, मल्चिंग, नमी संरक्षण और अंतरफसली खेती जैसे उपायों को बड़े स्तर पर अपनाने पर जोर दिया गया, जिससे उत्पादकता और किसानों की आय दोनों में वृद्धि हो सके। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन भी बैठक का प्रमुख विषय रहा। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार अरहर, उड़द और मूंग जैसी दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए राज्यों के सहयोग से दलहन क्षेत्र का विस्तार, बेहतर बीज उपलब्धता, फसल चक्र प्रबंधन और तकनीकी मार्गदर्शन को मजबूत किया जा रहा है। समीक्षा बैठक में उर्वरकों की उपलब्धता, मंडी भाव, जलाशयों में जल भंडारण और राज्यवार स्टॉक की स्थिति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून की प्रगति के साथ उर्वरकों की आपूर्ति को सुचारु रखा जाए और जहां भी कमी की आशंका हो, वहां पहले से पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि विश्वविद्यालयों, केवीके और राज्य कृषि विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर बल देते हुए कहा कि वैज्ञानिक तकनीक और शोध का लाभ तभी सार्थक होगा जब वह समय पर किसानों के खेतों तक पहुंचे। सरकार का लक्ष्य खरीफ 2026 को सुरक्षित, उत्पादक और किसानों के लिए लाभकारी बनाना है।

Manisha Saini
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