भारत सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0को लेकर स्टार्टअप संस्थापकों और निवेशकों का मानना है कि देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर शक्ति बनाने के लिए केवल बड़े निवेश पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन और मजबूत चिप डिज़ाइन इकोसिस्टम का विकास भी उतना ही आवश्यक है। ISM 2.0 के तहत सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए सीड फंडिंग, बौद्धिक संपदा (IP) विकसित करने में सहायता, इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक आसान पहुंच तथा चिप डिज़ाइन के टेपआउट की लागत कम करने के लिए डिप्लॉयमेंट-लिंक्ड प्रोत्साहन जैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाओं की घोषणा की है। इन पहलों का उद्देश्य भारतीय कंपनियों और नवाचारकर्ताओं को विश्वस्तरीय चिप डिज़ाइन और सेमीकंडक्टर तकनीक विकसित करने में सक्षम बनाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वित्तीय सहायता के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार किए जाएं, अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच मजबूत साझेदारी विकसित हो तथा आधुनिक तकनीकी अवसंरचना उपलब्ध कराई जाए, तो भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। इससे देश में उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत आत्मनिर्भर तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर उद्योग विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर सकेगा।
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