गोवा में भाषा-आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने और देश के सभी नागरिकों तक डिजिटल सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विभिन्न सरकारी विभागों, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं में डिजिटल तकनीकों के विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन अनुवाद, वॉइस टेक्नोलॉजी और स्थानीय भाषा आधारित डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देना था। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में डिजिटल समावेशन तभी संभव है जब नागरिक अपनी मातृभाषा में सरकारी सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और अन्य ऑनलाइन सुविधाओं का आसानी से उपयोग कर सकें। कार्यशाला में भारतीय भाषाओं के लिए डिजिटल डेटा, भाषा संसाधनों और ओपन-सोर्स तकनीकों के विकास पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इस बात पर बल दिया कि स्थानीय भाषाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित होने से ग्रामीण क्षेत्रों, छात्रों, किसानों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों को नई तकनीकों का अधिक लाभ मिलेगा। साथ ही, इससे डिजिटल साक्षरता बढ़ेगी, नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा और भारत के डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भाषा-आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर देश में तकनीकी समानता स्थापित करने, डिजिटल विभाजन को कम करने और'डिजिटल इंडिया' अभियान को अधिक समावेशी एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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