नई दिल्ली: भारत ने दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ कई महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements–FTAs) किए हैं। इन समझौतों से भारतीय उद्योगों को विदेशी बाजारों में बेहतर पहुंच, नए ग्राहक और कारोबार बढ़ाने के अवसर मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अब सबसे बड़ी चुनौती इन व्यापारिक अवसरों को वास्तविक निर्यात वृद्धि, निवेश आकर्षण, विनिर्माण विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बदलने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुसार अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। खासतौर पर एमएसएमई, निर्माता, स्टार्टअप और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को अपनाने, नई तकनीक और नवाचार पर ध्यान देने, मजबूत ब्रांड बनाने तथा अपनी आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर करने की जरूरत है। इससे भारतीय उत्पाद विदेशी बाजारों में अधिक भरोसे और प्रतिस्पर्धा के साथ पहुंच सकेंगे। सरकार की ओर से व्यापार सुगमता बढ़ाने, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI), बेहतर बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों से भारत के उद्योग क्षेत्र को मजबूती मिल रही है और देश को वैश्विक विनिर्माण तथा निर्यात केंद्र बनाने में मदद मिल सकती है। आने वाले समय में यदि भारतीय कंपनियां गुणवत्ता, कीमत, तकनीक और समय पर डिलीवरी के मामले में वैश्विक स्तर पर मजबूत होती हैं, तो FTA का लाभ देश के छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े उद्योगों तक पहुंच सकता है। इससे ‘मेक इन इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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